हमने ज़िन्दगी के हर रंग को देखा !
कभी धुप तो कभी छावो को देखा !
जिसे मोहोब्बत कहतें लोग हमने उसे !
कुछ सिक्को के खातिर बिकता देखा !
शीशे के इश दिलको हमने यारों !
मोहोब्बत के बाज़ार में नीलम होते देखा !
जिसकी जुदाई में आशु बहाए हमने उशही !
माशूक को किसी और के बाँहों में देखा !
अब कैसे करें मोहोब्बत पर यकीन हम !
हमने तो हर और बेवफा को देखा !
कभी धुप तो कभी छावो को देखा !
जिसे मोहोब्बत कहतें लोग हमने उसे !
कुछ सिक्को के खातिर बिकता देखा !
शीशे के इश दिलको हमने यारों !
मोहोब्बत के बाज़ार में नीलम होते देखा !
जिसकी जुदाई में आशु बहाए हमने उशही !
माशूक को किसी और के बाँहों में देखा !
अब कैसे करें मोहोब्बत पर यकीन हम !
हमने तो हर और बेवफा को देखा !