Thursday, 17 November 2011

pyar

हमने ज़िन्दगी के हर रंग को देखा !
कभी धुप तो कभी छावो को देखा !
जिसे मोहोब्बत कहतें लोग हमने उसे !
कुछ सिक्को के खातिर बिकता देखा !
शीशे के इश दिलको हमने यारों !
मोहोब्बत के बाज़ार में नीलम होते देखा !
जिसकी जुदाई में आशु बहाए हमने उशही !
माशूक को किसी और के बाँहों में देखा !
अब कैसे करें मोहोब्बत पर यकीन हम !
हमने तो हर और बेवफा को देखा !

Wednesday, 16 November 2011

swarnvijay: इन हसिनाओ का बुखार

swarnvijay: इन हसिनाओ का बुखार: इन हसिनाओ का बुखार चढ़ा! यारों मुझे डेंगू मलेरिया की तरह ! सलवार की जगह जिन्स बाधा ! तम्बाखू से फैले कैंसर की तरह ! इन हसिनाओ का बुखार च...

Tuesday, 15 November 2011

इन हसिनाओ का बुखार

इन हसिनाओ का बुखार चढ़ा!
यारों मुझे डेंगू मलेरिया की तरह !
सलवार की जगह जिन्स बाधा !
तम्बाखू से फैले कैंसर की तरह !
इन हसिनाओ का बुखार चढ़ा !
पहले इन हसिनोकी चूड़िया खनकती थी!
बादल की गरजने की आवाज़ की तरह ! 
आज  चूड़िया पड़ी रहती है यारों !
कार्पोरेशन के कचरे की खाद की तरह !
 इन हसिनाओ का बुखार चढ़ा!
यारों मुझे डेंगू मलेरिया की तरह !
माथे पर बिंदी नहीं कानो मैं बाली नहीं !
यह कुवाऱिया रहती है किसी बेवा की तरह !
इन हसिनाओ का बुखार चढ़ा!
यारों मुझे डेंगू मलेरिया की तरह !
पहले शर्मो हया के परदे मैं कुवाऱिया !
लगती थी मंदिर की मूरत की तरह !
होतो पर लाली लगाये अब लगती है !
इस विजय को किसी खून पीती चुड़ैल की तरह !
इन हसिनाओ का बुखार चढ़ा!
यारों मुझे डेंगू मलेरिया की तरह !